Wednesday, 29 November 2017

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50 करोड़ की ठगी का खुलेगा राज, पीएसीएल का प्रमुख दिल्ली सीबीआई के हत्थे चढ़ा


राजधानी समेत प्रदेश भर के दस हजार से ज्यादा निवेशकों से 50 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का राज अब खुलने वाला है। दरअसल पीएसीएल चिटफंड कंपनी के चेयरमैन समेत तीन अन्य जालसाजों को सीबीआई की टीम ने दिल्ली में गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी रायपुर पुलिस को मिली है। पुलिस अब ठगी के शिकार निवेशकों और कंपनी के दस्तावेजों को एकत्र कर उसे सीबीआई को सौंपने की तैयारी कर रही है। अफसरों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर जालसाजों को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया जाएगा।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि सहारा कंपनी के बाद देश की सबसे बड़ी चिटफंड कंपनी पीएसीएल है। सीबीआई ने पर्ल्स ग्रुप केचेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निर्मल सिंह भंगू के अलावा प्रबंध निदेशक सुखदेव सिंह, कार्यकारी निदेशक (वित्त) गुरमीत सिंह और पीजीएफपीएसीएल पॉन्जी स्कीम मामले के कार्यकारी निदेशक सुब्रत भट्टाचार्य को 55 हजार करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता के आरोप में गिरफ्तार किया है। कंपनी के कामकाज पर सेबी ने सबसे पहले 1998 में सवाल उठाया था। उसके बाद मामला कोर्ट में चला गया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई को जांच का जिम्मा सौंपा गया था। दो साल पहले सीबीआई ने कंपनी के 50 हजार करोड़ रुपए को फ्रीज कर दिया था। सीबीआई ने कंपनी के चेयरमैन समेत अन्य को पूछताछ के लिए सीबीआई दफ्तर में तलब कर सभी से अलग-अलग पूछताछ की। पूछताछ में उनके बयानों में विरोधाभाष होने पर सीबीआई ने कंपनी के चेयरमैन सहित अन्य तीन को गिरफ्तार कर लिया।
पीएसीएल की ठगी के शिकार प्रदेश के सैकड़ों निवेशकों ने पहले ही सीबीआई से कंपनी के खिलाफ शिकायत की थी जिसे जांच में शामिल किया था। इस संबंध में सीबीआई का दिल्ली मुख्यालय लगातार मौदहापारा पुलिस से संपर्क कर निवेशकों की जानकारी ले रहा था। पिछले साल चंगोराभाठा निवासी ललित देवांगन ने कंपनी के बांड पेपर के साथ थाने में कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पीड़ित निवेशकों की शिकायत को सीबीआई ने संज्ञान में लेते हुए कार्रवाई की थी। निवेशकों को अब अपने जमा रकम पाने के लिए कोर्ट का निर्णय आने का इंतजार है। उसके बाद ही उनके फंसे पैसे वापस होने की संभावना है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि निवेशकों की रकम वापसी के लिए सुप्रीम कोर्ट या फिर सेबी ही कोई फैसला ले सकता है।

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