Thursday, 25 January 2018

Pacl News 2018 | पीएसीएल ने उड़ाया निवेशको का चैन | Sebi Refund Status 2018 | Pacl Latest News In Hindi

-इंस्टालमेंट पेमेंट प्लान (आईपीपी) सीधे शब्दों में रिकरिंग डिपॉजिट प्लान।.
-कैश डाउन पेमेंट प्लान (सीडीपीपी) सीधे शब्दों में फिक्सड डिपॉजिट प्लान।
कंपनी के दावे के मुताबिक एक निवेशक को इस कंपनी से होने वाले अन्य लाभ

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-कृषि से होने वाली आय की परिपक्वता पर कोई कर नहीं।
-बिना अतिरिक्त भुगतान के
दुर्घटना बीमा कवरेज।
-कृषि निवेशकों को करीब 12.5 फीसदी ब्याज।



कहां-कहां फैला है कारोबार?
पीएसीएल राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत देश के
कई राज्यों में अपना नेटवर्क फैला चुकी है। पीएसीएल का मालिक कौन है, यह साफ नहीं है। लेकिन 57 साल के निर्मल सिंह भंगु पीएसीएल के प्रमोटर हैं। निर्मल दावा करते हैं कि वह रियल एस्टेट कारोबार के दिग्गज रहे हैं। उनके मुताबिक वे आवासीय परिसरों, विला फार्म, अपार्टमेंट, होटल रिसार्ट, व्यवसायिक कांप्लेक्स और शापिंग मॉल बना चुके हैं।

8 लाख एजेंटों का जाल
पीएसीएल से जुड़े देश भर में 8 लाख एजेंट 'चेन मार्केटिंग' सिस्टम या पिरामिड सिस्टम के तहत काम करते हैं। चेन मार्केटिंग सिस्टम के तहत अगर एक एजेंट दूसरे शख्स को एजेंट बनाता है



 तो उसके जरिए निवेश की गई रकम में भी पहले एजेंट को कमिशन मिलता है। इस तरह से अगर दूसरा एजेंट भी किसी तीसरे को एजेंट बनाता है तो दूसरे को तीसरे एजेंट के जरिए हुए निवेश में भी कमिशन मिलेगा। जबकि पहले एजेंट को अपने जरिए हुए निवेश के अलावा दूसरे और तीसरे एजेंट के जरिए हुए निवेश का भी कुछ हिस्सा कमिशन के तौर पर मिलेगा। अगर कंपनी खतरे में पड़ती है तो सबसे ज्यादा उस एजेंट पर असर पड़ता है जो पिरामिड के सबसे आखिर में है चेन सिस्टम के अंतिम सिरे पर है।

क्या होता है लालच ?
ग्राहकों को पीएसीएल में पैसे लगाते समय जमीन के मालिकाना हक से ज्यादा इस बात का लालच दिया जाता है 

कि उनके द्वारा खरीदी गई जमीन की कीमत बहुत तेजी से बढ़ेगी। आम तौर पर जमीन की कीमत पर 12.5 फीसदी सालाना रिटर्न का दावा किया जाता है। कंपनी में निवेश की मियाद आम तौर पर 5-10 साल तक होती है।

कैसे निवेशकों को रखा जाता है धोखे में ?
पीएसीएल के कामकाज को जानने वाले बताते हैं कि कंपनी में जमीन खरीदने के नाम पर पैसे जमा करने वाले लोगों को टाइटल डीड नहीं दिया जाता है। लेकिन अगर कोई ग्राहक यह कहता है 

कि उसे जमीन के मालिकाना हक के कागजात नहीं मिला तो वह खुद को जमीन का मालिक कैसे कह सकता है तो पीएसीएल के लोग कहते हैं कि आप कंप्यूटर से बनाई गई रसीद दिखाकर अपने मालिकाना हक का दावा पेश कर सकते हैं।

सेबी मानता है अवैध
पश्चिमी दिल्ली सहित देश भर में फैले 280 आॅफिस से पीएसीएल जो कारोबार करती है, उसे सेबी अवैध मानता है। सेबी का मानना है कि यह कलेक्टिव इनवेस्टमेंट स्कीम है, जिसे रियल एस्टेट कंपनी के रूप में चलाया जाता है। हालांकि कंपनी के वास्तविक कारोबार के रूप में अभी अंतिम रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है।



सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अंतिम फैसला देगा, जहां यह पिछले आठ वर्षों से लंबित है।इस दौरान पीएसीएल का कारोबार बढ़कर 100 गुना हो गया है। ग्राहकों ने प्लॉट बुक कराने के लिए कंपनी को ये पैसे दिए हैं। हालांकि ग्राहकों को वह प्लॉट दिखाया गया है और ना ही उन्होंने अपनी पसंद की जमीन का टुकड़ा खुद चुना है। पीएसीएल के पास जमा ग्राहकों का पैसा बढ़कर 20,000 करोड़ रुपए हो गया है। कंपनी इसे अग्रिम भुगतान बताती है।

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